Tuesday, 4 April 2017

बस तू ही तू ...



मेरा राम भी तू, मेरा रहीम भी तू

मेरा अल्लाह भी तू, मेरा भगवान भी तू

मेरा गंगासागर भी तू  मेरा हज भी तू

मेरा सज़दा  भी तू, मेरी आरती भी तू

मेरा दोज़ख  भी तू, मेरी जन्नत भी तू .....



मेरी मस्जिद भी तू, मेरा मंदिर भी तू

मेरी पूजा भी तू, मेरी इबादत भी तू

मेरी सुबह भी तू, मेरी रात भी तू

मेरी जिंदगी भी तू, मेरी मौत भी तू

मेरी मोहब्बत भी तू, मेरी नफ़रत  भी तू .....

मेरी हिम्मत भी तू, मेरी जरुरत भी तू

मेरी फुर्सत भी तू, मेरी नफरत भी तू

मेरी चाहत भी तू, मेरी अदावत भी तू

मेरी वादी भी तू, मेरी घाटी भी तू

मेरी मंजिल भी तू, मेरी डगर   भी तू ...



मेरा दिल भी तू, मेरा दर्द भी तू

मेरा गरूर भी तू, मेरा सरूर  भी तू

मेरा दिल भी तू, मेरा दिमाग भी तू

मेरा जूनून भी तू, मेरा फितूर भी तू

मेरा हमसफर भी तू, मेरा कारवां भी तू ....



मेरा सूरज भी तू, मेरा चाँद भी तू

मेरा दिन भी तू, मेरी रात भी तू

मेरा उजाला भी तू, मेरा अँधेरा भी तू

मेरा ईमान भी तू, मेरा अरमान भी तू

मेरा अहसास भी तू, मेरा दुःसाहस  भी तू

मेरा मान भी तू,  मेरा अपमान भी तू ....

तू नहीं तो कुछ नहीं .... इससे ज्यादा किसी की चाहत नहीं ...

........

BY
KAPIL KUMAR

Monday, 23 January 2017

नारी की खोज –अंतिम भाग


अभी तक आपने पढ़ा नारी की खोज भाग -1 से  15 तक में ...की मैंने बचपन से आज तक नारी के भिन्न भिन्न रूपों को देखा .......मेरे इस सफ़र  की आगे की कहानी.....


गतांक से आगे .......
अगर पुरुष से किसी नारी के सौन्दर्य  की परिभाषा पूछी जाए तो , हर पुरुष उसे अपनी तरह से बनाएगा और बताएगा , पर सुन्दरता के पैमाने में हर पुरुष की सोच में नारी के शरीर को लेकर कुछ चीज सब में कॉमन होंगी जैसे , आँखें , गाल , होंठ  , बाल, उरोज़  , कमर और नितम्ब , यह और बात है की इनमे किसी को किसी विशेष से ज्यादा लगाव होता है ...

जैसे किसी को पतले सुर्ख लाल होठ तो , किसी को गुलाबी भरे हुए गाल , किसी को भारी कसे हुए उरोज़  ,तो किसी को शरबती आँखें , तो किसी को मदमाती हिरणी की चाल , तो किसी को भारी नितम्ब , तो किसी को लंबी औरत , तो किसी को लहराते रेशमी बाल आदि आदि ...कहने का मतलब यह है की हर पुरुष अपनी पसंद के हिसाब से नारी के किसी विशेष अंग से सम्मोहित होकर उसमे अपनी सुन्दरता गढ़ लेता है और फिर उस विशेष अंग की सुन्दरता के आगे नारी के शरीर की बाकी सारी चीजे नगण्य हो जाती है .....

मैं जेंटलमैन क्लब में जैसे ही घुसा की मेरी आँखे चौंधिया  सी गई जिधर नज़र  उठाओ सांचे में ढली प्राकृतिक अवस्था में एक  से बढ़कर एक  हसीन , कमसीन ,दिलकश नारी के दर्शन उपलब्ध थे , क्या गोरी और क्या सांवली या कुछ और ....यूँ तो आज से पहले मैंने  नारी को प्राकृतिक  अवस्था में देखा जरुर था , पर वह दर्शन इतने कम समय के लिए होता था की उसमे सुंदरता  या कुरूपता जैसी किसी चीज को देखना , परखना या समझना नामुमकिन था .....

क्योंकि ..... नारी के शरीर के आकर्षण में बंधा पुरुष ऐसे ही होता है जैसे बहुत दिनों का भूखा भिखारी , जो पात्र से ज्यादा रोटी पर  अपना ध्यान रखता है , भूखा भिखारी , यह नहीं देखता की , जिसने उसे रोटी दी है , वह इन्सान और जिस बर्तन में उसे रोटी मिली है वह कितना साफ़ सुथरा है , वह तो बस किसी तरह से रोटी को जल्दी से जल्दी अपने पेट में पहुंचा कर अपनी भूख को शांत कर लेना चाहता है ....

किन्तु इसके विपरीत जो इन्सान पेट भरने के लिए नहीं खाता क्योंकि भोजन उसके लिए कोई बहुत महत्वपूर्ण चीज़  नहीं है , वह इन्सान भोजन को अपनी पसंद और शान शौकत के हिसाब से खाता है , वह उसके स्वाद , परोसने के सलीके , बर्तन , सजावट आदि को देखने , परखने के बाद ही भोजन के बारे में कोई राय कायम करता है ... जैसे हम लोग किसी रेस्टोरेंट  में खाना खाते हुए करते है .....आज मैं भी ऐसे ही मुकाम पर  खड़ा था .....जहां मुझे सिर्फ अपनी इच्छा  पूर्ति के लिए सेक्स नहीं करना था ....

क्लब में दो स्टेज थे , जिनपर एक  बड़ा सा पोल और लटकने के लिए एक  समांतर बार(पैरेलल ) भी बना हुआ था ,बड़े झिझकते हुए मैं और रिकार्डो एक  स्टेज के सामने लगी रखी टेबल और कुर्सी पर पसर गए ...मेरी आँखे थी की रौशनी और हैरानी से खुली हुई थी ...अपने जज्बातों को काबू में रख मैंने  स्टेज पर  मटकती लड़की पर  ध्यान देना शुरू किया ...

वह 20/22 की उम्र की सांचे में ढली अनुपम सुन्दरी थी , जो अपनी कामुक अदाओं और नग्न जिस्म की हरकतों से लोगो के अंदर सोये मर्द को जगा रही थी , उसकी एक  झलक भर से मेरा मर्द अकड़  कर हुंकारे लेने लगा , लड़की पतली और लम्बे कद की थी इसके बावजूद उसने एक  बहुत ही ऊँचे हील की सैंडलस पहने हुए थे ,उसकी तवचा गोरे रंग की और बाल सुनहरे थे ,उसे पहली ही नज़र  में देख दिल को एक  धक्का सा लगा की इतनी खुबसूरत लड़की सरे बाज़ार अपने जिस्म की कितनी बेहूदगी से नुमाइश कर रही है...

स्टेज के बैकग्राउंड में कोई गाना बज रहा था , जिसकी धुन पर वह अपने जिस्म को बड़े ही मस्ती भरे अंदाज में उमेठते हुए थिरक रही थी , उस वक़्त उसके शरीर पर  कपड़ो के नाम पर  इक झीनी पतली सी ब्रा और योनी को ढकने भर के लिएएक  लिनग्रीन (पतली सी नाड़े की पेंटी )थी ,ब्रा उसके भारी भरकम उरोजों  के लाल रंग के निप्पल को सिर्फ दिखावे के लिए ढक भर रही थी , पेंटी को देख ऐसा लगता था जैसे वह सिर्फ रस्म अदायगी के लिए पहनी गई है , उससे क्या ढक रहा था या क्या दिख रहा , यह अपने आप में खोज का विषय था उसको इस अवस्था में देख उत्तेजना में मेरा सर सुन्न सा होने लगा , मेरे हाथ पाँव  ठंडे से पड़ने लगे और जिस्म की ऐठन के साथ हल्की कंपकपी सी होने लगी ...मेरी बगल में बैठा रिकार्डो उस लड़की के डांस या क्लब के बारे में क्या कह रहा था , उस वक़्त मुझे ना कुछ सुनाई दे रहा था और ना ही समझ आ रहा था ...

मेरी आँखें उस लड़की के शरीर को इस तरह से घूर रही जैसे कोई एक  भूखा शेर की मेमने के शरीर में गोश्त को देखता है ... मेरी आँखें बार बार उसके शरीर का मुआयना करने के बाद उस लड़की के चेहरे पर  आकर रुक जाती , उसकी खुबसूरत आँखें , लहराते रेशमी बाल ,लाल सुर्ख  होठ , गुलाबी गाल और सांचे में ढला बदन मुझसे हर बार यही सवाल करता , की इतनी खुबसुरत लड़की को ऐसे सरे बाजार नुमाइश करने की क्या जरूरत है ?यह अगर अपने देश में होती तो जरुर एक  टॉप मॉडल होती .....

आज से पहले इतनी खुबसुरत लड़की मैंने  कभी इतने पास से देखी तक  ना थी , मैंने  जितनी भी मॉडल टीवी के विज्ञापन या किसी मैगज़ीन  में देखी थी वह सब इसके आगे कहीं  टिकती भी  ना लगी , बिना कपड़ों  के इतने करीब से किसी को देखने की कल्पना ही मुझे उत्तजित करने के लिए काफी थी , पर इस वक़्त हकीकत मेरे सामने मुंह  खोले खड़ी थी , लड़की ने मुझे यूँ घूरते देखा तो उसने एक  कामुक अंगड़ाई ली और मेरी तरफ मुस्कुरा कर उसने दोनों हाथों से  बार को पकड़ा और उस पर  लटकते हुए अपनी दोनों टाँगे हवा में उठा दी ..उसके शरीर का लचीलापन देख मेरे मुंह  से एक सीटी  निकल गई , मेरी इस हरकत से लड़की और जोश में आ गई , वह बार को छोड़ , उसने पोल को से एक  हाथ से कस  कर पकडा और एक  जोरदार घुमावदार राउंड लिया और फिर जमीन पर  घुटनों  के बल आकर स्टेज पर आ कर  बैठ गई , स्टेज पर बैठते हुए उसने अपने दोनों उरोजों  को कस कर एक  दूसरे  से मिलाकर भींच दिया ....

उसकी इस हरक़त  ने जैसे मेरे अंदर एक  आग सी लगा दी , मुझे अपने ऊपर कंट्रोल करना मुश्किल होने लगा , अभी मैं इस झटके से संभलता की उसने अपनी चोली को एक  झटके में अपने शरीर से जुदा कर स्टेज के एक  कोने में फैंक दिया .....उसके दुशिया उरोज़  अपनी मामूली सी क़ैद  से आजाद हो कर एक मासूम  बछड़े की तरह से अपनी जगह उछल कूद करने लगे ,उसकी इस अदा पर जैसे मैं तो सकते में आ गया ...उत्तेजना से मैंने  रिकार्डो से पूछा ...यह और क्या क्या करेगी ?

रिकार्डो ने एक  गहरी मुस्कान मेरी तरफ उछल दी और बोला , यह तो अभी शुरुवात है ...आगे देखो क्या होता है ...अभी उसकी बात ख़त्म ही हुई थी की , एक  लड़की जो वेट्रेस थी हमारी टेबल पर  आर्डर लेने आगई ....हम दोनों ने नज़र  उठाकर उसे देखा तो , उसने एक गहरी मुस्कान हमारी तरफ उछाल दी और बोली बताओ कौन सी ड्रिंक आर्डर करनी है ....मैंने नज़र उठाकर उसे देखा तो ...सुन्दरता में वह भी अच्छी खासी मॉडल जैसी थी , जिसने एक  छोटी सी ब्रा और नाममात्र की पेंटी से अपने शरीर के गुप्त अंगो को दिखावे भर के लिए ढक भर रखा था ....मैंने कांपती हुई आवाज में उसे दो बियर लाने के लिए कहा और ऐसा कह अपना ध्यान स्टेज पर  लगा दिया ....

स्टेज वाली लड़की अपने शरीर को एक  रबड़ की गुडिया की तरह इधर से उधर तरोड मरोड़ रही थी , कभी वह अपनी टांगों को १८० डिग्री पर  खोलकर स्टेज पर  बैठ जाती या फिर बार से लटक उन्हें हवा में उठा देती या फिर पोल पर  चढ़कर उससे लिपटकर कभी ऊपर से नीचे  उतरती या फिर उसे एक  हाथ से पकड उसके सहारे झूल जाती ... इतनी लचक वाला बदन मैंने  सिर्फ टीवी में जिमनास्ट का या फिर किसी सर्कस में काम करने वाली लडकियों का देखा भर था , पर यह अनुभव तो मुश्किल से 3/४ फीट की दूरी पर मेरे सामने हो रहा था , उसपर उसकी कामुक अदाएं  , मेरी उत्तेजना की आग में घी डालने का काम कर रही थी ....मुझे अपनी पेंट के अंदर ऐसा लग रहा था की जैसे कोई जवालामुखी कभी भी फूट सकता है .....


अचानक लड़की अपनी एक  टांग को सीधा करके कंधे तक लाई  और फिर पोल पर एक  घुमाव लिया और सीधे होते ही अपने शरीर से नाममात्र की पेंटी को भी अलग करके स्टेज के एक  कोने में उड़ा दिया , अब वह अपनी पूर्ण रूप से प्राकृतिक अवस्था में थी और अपने शरीर को अलग अंदाज में मटका मटका कर हिला रही थी ... इस बार तो उसने हद कर दी , वह स्कवेट वाली मुद्रा में स्टेज पर  बैठी और वहीं  से उसने अपनी योनी को एक अज़ीब तरीके से हिलाना शुरू कर दिया , वह अपनी योनी को कभी टांग फैला कर खोल देती तो कभी अपनी ऊँगली से उन्हें सहला देती ...


मैं भी जोश में होश खोता हुआ स्टेज के पास चला आया और उसे जितना करीब हो सकता था उसके शरीर का ज़ायज़ा  लेने लगा ....सारे शरीर को मुआयना करने के बाद मेरी आँखे आकर उसकी योनी पर टिक गई , जैसे ही मैंने  अपनी निगाहे वहां टिकाई की उसने एक  तीखी मुस्कान के साथ मुझे देखा और अपनी दोनों टाँगे खोल दी और स्टेज पर  लगे बार से झूले की तरह से झूलने लगी , उसका शरीर हिचकोले लेता हुआ मेरे चेहरे के करीब आता और फिर दूर चला जाता , जब जब उसका शरीर मेरे करीब आता , उसकी योनी से निकलती गंध को मैं अच्छे से महसूस कर पा रहा था ...

उसकी योनी चमकदार और पूरी तरह से सफाचट थी जिसपर किसी भी बाल का दूर तक नामोनिशान तक नहीं था और न ही उसके आस पास किसी भी तरह के दाने , खरोंच या कटे फटे होने का कोई भी निशान मौजूद था ,शायद फैशन या फिर शौक के लिए सिर्फ एक  बड़ी बिंदी जितने भूरे बाल उसने योनी के उपरी सिरे के पास रख छोड़े थे , ऐसा लगता था , जैसे किसी इंसानी लैब के सांचे में ढली योनी उसके शरीर पर  अलग से लगा सी दी गई है ...

योनी में भी सुन्दरता हो सकती है यह मैंने  उस दिन जाना और समझा , अब मुझे अपने ऊपर काबू रखना मुश्किल हो गया ऐसा लगता था , ना जाने कब कोई विस्फोर मेरी पेंट के अंदर हो जायेगा , किसी शर्मिंदगी से बचने के लिए मैं बाथरूम चला गया और वहां  जाकर अपने को हल्का करने लगा .....

बाथरूम से लौटा तो रिकार्डो ने मुझे देखा और एक  गहरी मुस्कान छोड़ दी , जैसे वह समझ चूका था की बिना बियर पिए भी मुझे बाथरूम जाने की क्या जरूरत आन पड़ी , तभी वेट्रेस अपनी मदमाती चाल में आई दो बियर हमारी टेबल पर  रख दिए , इसी वक़्त उसने अपने भरी भरकम नुकीले कसमसाते उरोजों  को एक  झटका दिया और फिर एक  तीखी मुस्कान हम पर डाल कर चली गई ....

हल्का होने से अब मेरा दिमाग संतुलन में था , अब मेरी निगाहें  क्लब का जायज़ा लेने में जुट गई , क्लब में हमारे स्टेज जैसा एक  और स्टेज था , जिस पर भी एक  लड़की ऐसे ही कामुक अंदाज में अपने शरीर को पोल और समांतर बार के सहारे तोड़ मरोड़ रही थी ...वहां पर काम करने वाली वेट्रेस भी बस नाममात्र के कपडे पहने अपनी मदमाती चाल में इधर से उधर घूम कर शांत बैठे लोगों के दिलो , दिमाग और शरीर में अपनी तरफ से चिंगारी लगा रही थी ...

मुझे नहीं मालुम की जन्नत में कितनी हूर है या स्वर्ग में कितनी अप्सराएं  है , मेरे लिए यह अनुभव किसी जन्नत या स्वर्ग की कल्पना से ज्यादा मोहक और उत्तेजक  था , मैं वहां जिस भी लड़की को देखता वह या तो नाम मात्र के अंग वस्त्रो में होती या फिर बिना किसी अंग वस्त्र को पहने , अपनी प्राकृतिक अवस्था में बड़े ही सामान्य ढंग से किसी के साथ कुर्सी पर बातों  में मशगुल या फिर क्लब के बार के साथ लगे ऊँचे स्टूल पर बैठी थी ...उन्हें जैसे फर्क ही नहीं पड़ता था की उनके शरीर पर कोई कपडा है भी या नहीं ....

इस वक़्त मेरी हालत उस निरीक्षक जैसी थी , जिसे १० टॉप बच्चो में सबसे ज्यादा होशियार और काबिल बच्चे को ढूंडना था , उसके लिए सामान्य परीक्षा के बजाय किसी और तरह की विशेष परीक्षा ही उनकी काबलियत का सही मुल्यांकन कर सकती थी ....

अगर मैं आप लोगो से पूछू की नारी की योनी की सुन्दरता के क्या मापदंड है तो शायद अधिकतर आदमी बगले झाँकने लगेंगे , क्योकि योनी में भी सुन्दरता का कोई मापदंड हो सकता है ऐसी सोच शायद अभी विकसित नहीं हुई है या पुरुष इतनी दूर तक सोच नहीं पाया ?

इसके विपरीत नारी के मन में परुष के लिंग को लेकर कहीं ना कहीं एक सोच छुपी होती है , यह और बात है की अधिकतर नारी अपनी सोच को अपने मन के किसी कोने में दफ़ना देती है और वह इस सोच को अपने पति या प्रेमी से कितना भी खुला होने के बावजूद  उसे बताने में संकोच करती है .....पर यह सोच उसके उत्तेजित होने और चरम अवस्था में पहुँचने पर ही मालूम  होती है ...की नारी की लिंग के प्रति क्या सोच है , वह उसे सिर्फ एक मिलन का माध्यम समझती है या बच्चे पैदा करने भर का अस्त्र या शारीरिक सुख का माध्यम या फिर उसमे उसे एक  ऐसा विशेष आकर्षण होता है , जिसकी कल्पना वह सिर्फ अपने मन में करती है ... कभी कोई नारी लिंग की विशेष गंध को मुख मैथुन के द्वारा महसूस करना चाहती है .....

यह सब बाते ऐसी है जो अधिकतर नारी के अंतर्मन में दबी  छिपी रहती है क्योकि उन्हें बाहर  निकालने का मतलब , अपने चलते फिरते रिश्ते में एक  रुकावट बनने का अनजाना  सा डर , जो उसे यह सब कहने या सुनने से रोके रखता है ....

जहां  तक मेरा विश्वास है अधिकतर लोगो ने कामसूत्र पढ़ा होगा , नहीं तो उसे बारे में सुना जरुर होगा , अपने जवानी के दिनों में मैंने  भी पढ़ा था .... पर आज इस क्लब में आकर ऐसा लगा की जैसे वात्स्यायन  को पुनर्जन्म लेने की आवश्यकता है , शायद वह अपने कामसूत्र का नया संस्करण लिख ले ...शायद जब वात्स्यायन ने कामसूत्र लिखा था , तब उसने नारी के शरीर को इस तरह खुली अवस्था में इतने अच्छे ढंग से देखा और परखा नहीं होगा ....

अब मेरी उत्सुकता स्टेज पर आने वाली हर लड़की की योनी को देखने और परखने में थी , हर 10  से 15  मिनट में नयी लड़की स्टेज पर  आकर अपनी अदाओं  , शरीर और डांस का नज़ारा  पेश करती , जो जितनी कामुक , हसीन और मस्त होती उसे उतनी ही ज्यादा , वहां आये हुए अधेड़ उम्र के मनचलों द्वारा टिप मिलती ....क्लब का नियम था , आप स्टेज के पास जाकर खड़े हो सकते है , लड़की की मर्जी है की वह आपको छुए या अपना शरीर आपके गाल या हाथ से छुआ  दे , पर आप उसे अपनी तरफ से टच नहीं कर सकते और ना ही स्टेज पर चढ़ सकते है , अगर कोई ऐसा करता तो क्लब के बाउंसर उसे बाहर  फैंक देते .जो लड़की जितनी ज्यादा कामुक , अच्छी फिगर वाली और मस्त होती उसके स्टेज के आगे मनचले अधेड़ कुछ  डॉलर्स  के नोट लेकर खड़े हो जाते , वह उन्हें कभी अपने उभारों  को ,तो कभी अपने नितंबों को हिलाकर दिखा देती , तो कभी अपने गाल या उरोजों  को उनके चेहरे पर रगड़  देती , और बदले में वह कुछ (2/4 $) नोट लड़की की जांघ पर  बंधी एक  रबर बैंड में खोंस देते ... अगर किसी मनचले की टिप कुछ जरा ज्यादा (10 या 20 $)मोटी होती तो , वह उनके आगे घुटनों के बल बैठ अपनी योनी को खोल कर उसके दर्शन करवा देती या , एक  लड़की ने एक  मनचले के गले में अपने टांगो की कैंची बन कर अपनी योनी उसके मुंह  से रगड़  तक दी ....


आज से पहले मैंने  नारी की सुन्दरता को उसका चेहरे में , गुलाबी गाल , सुर्ख होठ , कज़रारी आँखे में देखी  या फिर नारी के शरीर में उसके उभरे नुकीले उरोज़  , कड़क  भारी नितम्ब , चिकनी लंबी टाँगे और लहराते काले बाल सोचे भर थे , पर योनी से भी नारी के शरीर की सुन्दरता देखी और समझी जा सकती है इसका अनुभव आज हो गया था ....ना जाने क्यों मेरे मन में वहां घूमती हर सुंदर लड़की की योनी को ध्यान से देखने का भूत सवार हो गया ....क्योंकि बांकी हर चीज में तो सब जैसे एक  समान खुबसूरत थी ....

कुछ डॉलर्स  में कोई जवान हसीन लड़की ऐसी हरकत भी कर सकती है यह मेरी सोच और समझ के बाहर था , दो चार लडकियों की परफॉरमेंस देखने के बाद , मूझे उनके शरीर में अब कोई दिलचस्पी नहीं रह गई थी , सारी लडकियों के बदन सांचे में ढले , उरोज़  कसे और अच्छे से तने हुए और चेहरे कामुक आदाओं  से भरपूर थे , उस वक़्त उनमे से किसी एक  को भी पाना ही जीवन में सुन्दरता का अनुपम उपभोग हो जाता ...अब मुझे उनकी शारीरिक सुन्दरता से किसी भी तरह का तनाव महसूस नहीं हो रहा था ....

इस वक़्त मेरी हालत शादी में आये उस भूखे आदमी की तरह थी जिसकी भूख शांत हो चुकी थी अब वह सिर्फ मन बहलाने के लिए मंडप में सजी मिठाइयों को सिर्फ देख रहा था ...

अब मुझे किसी के चेहरे या चाल , ढाल या फिर उरोजों  में कोई दिलचस्पी नहीं थी ,सब अपने आप में किसी ना किसी तरह से बेमिसाल थी , अब मैंने  स्टेज पर आने वाली हर लड़की की योनी को देखना और परखना शुरू कर दिया , इसी सिलसिले में , भविष्य में ,मैं जितनी बार भी जेंटलमैन क्लब गया , मेरा उद्देश्य नारी की योनी को देखना , समझना और परखना होता जितना मैंने  देखा और समझा और इसी जिज्ञासा ने मुझे योनी की एक नई व्याख्या सिखाई ...

वात्स्यान ने कामसूत्र में योनी को नारी के शारीरिक आकर के हिसाब से ४ तरह से लिखा , जैसे शशक (खरोगश ), हिरणी , घोड़ी(अश्वनी) और हथनी ...शायद उस वक़्त वात्स्यान के दिमाग में सिर्फ योनी का आकर ही एक  महत्वपूर्ण कारक था , इसलिए उसने योनी के आकर के हिसाब से नारी की व्याख्या कर दी ...की सबसे छोटे कद की खरोगश और सबसे बड़े कद की हथनी ...और तो और उनके सफल और आनंदायक सम्भोग के लिए उन जैसे साथी का चयन भी बता दिया ...

पर मेरे अनुभव ने नारी की योनी को  सबसे अलग एक  नयी तरीके की व्याख्या  दी और योनी की सुन्दरता का एक  पैमाना बनाया ...मेरे अनुभव ने यह समझाया की किसी भी नारी या पुरुष के शरीर के अनुपात में उसका गुप्तांग हो ऐसा जरुरी नहीं है , इसलिए किसी भारी भरकम नारी जो वात्स्यान के हिसाब से हथनी वाली श्रेणी में आती है की योनी का आकर भी बड़ा होगा और उसे सम्भोग में अपने जैसे हाथी टाइप बड़े आदमी से पूर्ण संतुष्टि मिलेगी , यह भी एक  मिथ है ...

मैंने उस दिन और बाद में भी जेंटलमैन क्लब में नारी की कई तरह की योनियाँ देखि , कई बार तो अच्छे लम्बे कद की लड़की की योनी बहुत छोटी और सिकुड़ी सी होती , इसके विपरीत एक  छोटे कद की लड़की की योनी बड़े आकर में फैली सी होती और दोनों के योनी मार्ग भी उनकी योनियों के आकर अनुपात के हिसाब से ना होकर कभी बहुत ज्यादा खुले या तंग होते ...

मैंने  नारी की योनी को एक  ऐसी श्रेणी में रखा जिसमे योनी की तुलना हम किसी संकरी सी गली के आगे लगे दरवाजे से कर सकते है ...इसे ऐसा समझे जैसे किसी घर के आगे एक  दरवाजा है जिसमे दो पल्ले(कपाट) लगे है यानी दो किवाड़ वाला दरवाजा है ....अब यह उस दरवाजे की हालत पर  निर्भर करता है की.......

1.दोनों कपाट इस तरह से भिड़े है की वह दोनों जुड़ कर लगभग बंद जैसे लगते है और उन दोनों कपाट के जुड़ने से दोनों के बीच में हलकी सी एक  झिरी सी दिखती हो या
२. दोनों कपाट अंदर की तरफ थोड़े से खुले है, जैसे किसी ने दोनों दरवाजो को घर के अंदर धकेल का हल्का सा खोल कर छोड़ दिया है या
3. दोनों कपाट बाहर  की तरफ ऐसे खुले है जैसे किसी ने हड़बड़ी में दरवाजे बाहर  की तरफ खोल कर छोड़ दिए है या
४. एक कपाट के ऊपर दूसरा कपाट ऐसे सा चढ़ा , जैसे दरवाजा बंद करते वक़्त किसी ने अनाड़ीपन में एक  कपाट पर  दूसरा कपाट लगा कर छोड़ भर दिया है...

मेरे अनुभव ने नारी की योनी को उनकी सुन्दरता , आकर और शारीरिक आकर के हिसाब से देखा और परखा , क्योकि नारी की योनी किसी विशेष समुदाय , देश ,रंग और जीन्स के हिसाब से अपना आकर लेती है और योनी की सुन्दरता और विशेषता या ऐसी नारी के प्रति पुरुषो में इच्छा भी उसके देश में उसी हिसाब से मापी भी जाती है ...

इन चारो श्रेणी की नारी में योनी का आकार बड़ा या छोटा कुछ भी हो सकता है और किसी व्यक्ति विशेस का अपनी योनी को स्वच्छ और साफ़ सुथरा रखना भी , योनी की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है ...एशियाई देश की अधिकतर नारी अपनी योनी के आसपास छोटे बाल रखती है और जापान में ऐसी योनी को बहुत आकर्षक भी माना जाता है ...इसके विपरीत योरोप के देश में अधिकतर नारी क्लीन शेव योनी रखती है या योनी के पास बाल की एक  पतली लाइन सी और ऐसी योनी पुरुषो के आकर्षण का केद्र बिंदु भी होती है .....किसी पुरुष को नारी की सुनहरी या सांवली योनी में तो किसी को हलकी गुलाबी योनी में आकर्षण लगता है .

मैंने  जितनी भी तरह की योनी को देखा और परखा , तो लगा योनी की तुलना होठों  से की जा सकती है मुझे वह योनी सबसे ज्यादा आकर्षक लगी जिसमें  दोनों कपाट जुड़ कर बंद से प्रतीत होते है , क्योंकि यह ऐसी प्रतीत होती है जिसे किसी खुबसूरत लड़की के पतले होठ एक  लिपस्टिक से सज कर जुड़े से हो , पर होठ अगर ज्यादा मोटे हो यां लटके हो तो उनमें  एक तरह की बदसूरती सी आ जाती  है , हो सकता है किसी को उस तह के होठ पसंद हो , क्योंकि अभी  कुछ दिन पहले फ़िल्मी हेरोइनो में मोटे होंठों  का फैशन बड़े ज़ोरों  पर था ...

मेरे अनुभव से किसी योनी के मार्ग में आगे की तरफ लटकी छोटी सी खाल जिसे मेडिकल टर्म में लाबिया मिनोर्मा (लघु कोष्ठ) बोलते है का ज्यादा फैला होना योनी की सुन्दरता को कम कर देता है ...उसका बहुत कम होना भी योनी की सुन्दरता को कम करता है ...अगर यह हद  से ज्यादा हो तो सम्भोग में नारी को अनचाही दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है , पर इसके विपरीत अगर यह थोडा आकर में छोटा हो तो , पार्टनर द्वारा मुख मैथुन में नारी को अतिरिक्त संतुष्टि और आनन्द देना वाला भी हो जाता है .... इसके विपरीत इसका ना होने से योनी में एक तरह  का अपना आकर्षण होता है .

कितनी सारी योनियों में कहीं  किसी का द्वार बहुत बड़ा तो कहीं  सिकुड़ा सा होता , कहीं  लाबिया कुरूपता की हद तक लटकी होती तो कहीं  वह नाममात्र की जगह लेकर योनी को एक  सुरक्षा कवच  सा प्रदान करती , किसी किसी नारी की योनी के आसपास , लगी खरोचें  या हलके दानें उनके प्रति एक अज़ीब  सी उबकाई पैदा करते , तो किसी की योनी की चमक , उसके प्रति एक अज़ीब सी कशिश भी पैदा करते हैं .....

कहने का तात्पर्य यह है की , किसी नारी का चेहरा खुबसूरत, सांचे में ढला बदन और कामुक अदाएं  हो और उसकी योनी भी सुंदर और आकर्षित हो ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता , कई बार नारी की लापरवाही उनकी योनी में अनजानी बदसूरती भी उड़ेल देती ....जबकि वह नारी हर लिहाज़  से अनुपम सुन्दरी होती है ...

इसी खोज   में मैंने  कई तरह की योनियों का अध्यन किया और आज भी जब किसी खुबसूरत नारी को देखता हूँ तो मेरा मन खुद से यह सवाल करता है की , इसकी सुन्दरता किस पैमाने से नापूं , इसे शारीरक रूप से देखूं  या इसकी अदाएं  कितनी मतवाली है या इसकी आँखे कितनी गहरी या इसकी चाल कितनी मस्त है या इसके होठ कितने रसीले या इसके बाल कैसे लहराते है या इसके गाल कैसा मीठा अहसास जगाते है या इसके उरोज़  कितने कामुक है या इसकी टांगे कितनी चिकनी होंगी यह कपड़ो में ज्यादा खुबसूरत होगी है या बिना कपड़ो के या इसका दिल कितना खुबसूरत है वह समझू ....

अगर यह बिना कपड़ों  के होगी तो क्या इसका शरीर सांचे में ढला जैसा होगा या फिर इसके उभार कसमसाते से होंगे या फिर इसकी योनी की खूबसूरती मुझे मतवाली बना सकेगी .....

बस यह कभी न ख़त्म होने वाली मेरी प्यास एक  आजन्म की खोज़  बनकर मुझे दर बदर भटका रही है .....

By
Kapil Kumar 

समाप्त :

Note: “Opinions expressed are those of the authors, and are not official statements. Resemblance to any person, incident or place is purely coincidental.' ”

Wednesday, 18 January 2017

I wish.....


I wish that
 I could be a kite,
 Flying without fear of falling
 In the open sky,
I want to climb very high 
Leave the ground for a while.

Moving towards the sun
And to chase the clouds,
To fill the wind in 
My body and mind.
I will go up and down
To catch the thrill 
Which was missed
Just laying on the ground.

I may get very easy to loose
There is no worry
A strong string attached to my hook.
Someone is holding me tight and mild,
Give the right boost
 To keep me flying.
If  I go too much down 
Someone pulls me tight 
I get back around.

My thirst wants
 To take me too much far,
Thankful to the attached string to
Bring me at par. 
I am too light and fancy 
People amaze how I could fly so rashly.
I can fly fearlessly  till I am strong 
Once this relation is broken 
I may end up at no one's land.

I am delicate and fragile
Still hardly hurt 
Even hit  hard from a high,
Never lose my courage to go up again 
Hardened push teaches me a lesson 
You can always begin again

By
Kapil Kumar

Thursday, 5 January 2017

प्रेम की वज़ह


यह तेरे ही तो दिल का दर्द है , 

जो मेरे सीने में उठता है फिर इस दर्द को हम पिए , 
दोनों की ऐसी कौन सी सजा है ?
यह तेरा ही तो आँशु है , 
जो मेरी आँखों से बहते है फिर इस सजा को इस तरह काटे , 
ऐसा कौन सा गुनाह हमने किया है ?
यह तेरी ही रूह का तो आकर्षण है , 
जो मुझे तेरी तरफ खींचता है 
फिर मुझसे तू इस तरह से दूर जाए , 
ऐसी कौन सी मेरी ख़ता है ?
यह तेरा ही तो बनाया बंधन है ,
 जिससे मैं बंधा हूँ फिर मुझसे यूँ रुसवा होने की , 
यह किसके लिए तेरी वफ़ा है ?
यह तेरा ही तो मोह है , 
जिसके खातिर मैं तेरे पीछे पड़ा हूँ फिर मुझसे रूठ जाने की , 
यह कौन सी तेरी अदा है ?
यह तेरा ही तो जीवन है , 
जिसके सहारे चलती मेरी साँस है फिर इस बात को भूल जाने की , 
ऐसी कौन सी वजह है ?
यह तेरा ही तो शरीर है , 
जिससे मेरा भी दिल जुड़ा है फिर इस तरह से मुझे अलग करने की , 
यह किसके प्रेम की  वज़ह  है ?

By 

Kapil Kumar 

Wednesday, 4 January 2017

हर रूप में बार बार ....


किसी को मोहब्बत होती है जिस्म से , तो
किसी को होती है अपनी जान से 

कोई मर मिटता है किसी के हुस्न पर , तो कोई
होता है फ़िदा अदा पर 

मैं अपनी मोहब्बत और चाहत की क्या तारीफ़
करूँ 

जो शुरू और खत्म होती है बस तेरे नाम से ....

तू
करती है शिकवे शिकायत मेरी मोहब्बत के बार बार 

उसे तोल कर देखती है रूह के रिश्तों में हर
बार 

कभी मेरी रूह से मेरे जिस्म का हाल भी पूछ
लेना 

जिसने बस तुझे चाहे हर रूप में बार बार ....

By
Kapil Kumar 

नववर्ष


मिले तुझे नववर्ष में यह उपहार , रहे तेरी जिन्दगी गुलज़ार  

यूँ तो तुझे चाहत नहीं है , इस चमकती दमकती
चीज़ों  की 

पर चमके तेरा चेहरा खुशियों से बार बार 

जैसे बीता वर्ष छूट गया पीछे , तू भी छोड़
दे अपनी जिद के सलीके 

आ नए साल में एक  ऐसा जश्न मनाये , हम कौन
है क्या है इसे बस भूल जाए .....


By 
Kapil Kumar