Wednesday, 23 December 2015

नारी की खोज---7



अभी तक आपने पढ़ा (नारी की खोज भाग –1 , 2 , 3,4 ,5 और 6 में ) ...की मैंने  बचपन से आज तक नारी के  भिन्न भिन्न रूपों को देखा .......मेरे इस सफर की आगे की कहानी.....



गतांक से आगे .......

हर इंसान सपने देखता है और उनका मतलब, हर कोई अपने अपने तरीके से लगाता है कोई उन्हें याद करके ,उनसे जीवन में पहले घटी हुई किसी घटना का सम्बन्ध स्थापित करता है तो कोई उसमें  आने वाले भविष्य की झलक देखता है .... कभी सपने हमारे मूड को अच्छा बना देते है तो कभी हमें एक  अनजाने डर में भी डूबा  देते है ..... अधिकतर सपने हम सुबह होने तक भूल जाते है , यूँ तो सपने आते है चले जाते है पर कुछ सपने अपने निशान भी छोड़ जाते है ....ऐसा ही एक ना भूलने वाले निशान, मुझे अपने सबसे पहले रंगीन सपने ने दिया था  .....

सुनील के घर, एक  दिन और रुकने के बाद मैंने उससे विदा ली और बस पकड अपने घर की ओर रवाना हो गया .... मन में एक  उदासी थी की , क्या क्या सपने देखे थे और सारे  सपने , हवा के एक  झोके  से , रेत के महल की तरह, एक  ही झटके में ढह गए ....

पर उस वक़्त मुझे क्या पता था , की आने वाले दिनों में मेरी प्यास  एक  शीतल झरना बुझाने वाला था और वह  झरना मुझे यौवन  की भट्टी में तपा तपा कर , एक  कुशल घुड़सवार बनाने वाला था ......

सुनील के घर से आने के बाद , मैं  उस घटना को दो चार दिन में भूल गया , कि   ऐसा भी कुछ घटित हुआ था ।  पर मेरा शरीर , जो लडकपन से युवा अवस्था में कदम रख चूका था , उसके लिए वह  सब भूलना शायद इतना आसन ना था ....जब जब मेरा लड़कपन  , उस घटना को याद करता , एक  अनजानी सी कसक बदन में उठ जाती .... सब कुछ ना पाते हुए भी मैंने  , नारी के शारीर को प्राकृतिक अवस्था में देखा था , उसके स्पर्श और आलिंगन का आनंद भोगा था ...

गर्मियों के दिन थे , एक  रात मैं खुले आसमान के नीचे  , घर की छत पर खाट पर लेटा हुआ बिस्तर पर  करवट बदल रहा था, की , अचानक से , सुनील के घर वाली घटना , मेरी आँखों के  सामने उभर आई , उस घटना को याद  करने से , मेरे ख्यालों में रोनी की बीवी के जिस्म से लिपटने , उसके उभारों  को चूमने और मसलने का अहसास उभरने लगा , जो मेरे जिस्म में एक  अजीब सी ताकत और बैचेनी फूंकने लगा , अभी मैं उस अहसास को अपने जिस्म में समेट पाता ...की तभी मुझे पसीने से लथपथ उसका शरीर याद आ गया , जिसने  मेरे उभरते अरमानों को उठने से पहले ठंडा कर दिया था ।  मेरी हालत ऐसी थी , की ....

किसी शाकाहरी इंसान ने भूख की रों में बहकर , मांस  का सेवन तो कर तो लिया ,पर  भूख लगने पर ,उसके ख्याल भर से, उसे कभी उबकाई, तो कभी उसकी चाहत उभर आती हो  .....

ख्यालों के इस  कशमकश से लड़ते हुए , मेरी कब आँख लग गई , मुझे पता भी ना चला और मैं गहरी नींद में सो गया ...  सपने में मैंने  देखा , एक अत्यंत  सुन्दर स्त्री मुझे अपनी तरफ इशारा करके बुला रही है , उसके आँखों के आमन्त्रण से सम्मोहित सा , मैं उसकी और खिंचा चला जा रहा हूँ , फिर वह  मुझे अपने साथ एक  बिस्तर पर  ले जाती है । वहां  मैं उसके साथ अपनी अधूरी इच्छा को पूर्ण करता हूँ और अपने यौवन  के मद को उसके अन्दर स्खलित कर देता हूँ ... उस वक़्त मुझे ऐसे महसूस होता है , जैसे मैंने  किसी स्त्री के साथ बिस्तर पर  सम्भोग किया हो ...उस वक़्त ,अपने यौवन  की इच्छा के पूरा होने से, मुझे एक  असीम आनंद की प्राप्ति होती है और मैं बहुत हल्का हल्का महसूस करता हूँ ।  जैसे किसी ने अपने शरीर से कोई भारी बोझ अलग कर दिया हो , उस वक़्त मुझे अहसास हुआ ,की आज मैंने  अपनी असली मंजिल को पा लिया ....

अगले दिन जब सूरज की तीखी रोशनी  मेरी आँखों में चुभी और भिनभिनाती मक्खियों  ने मेरा सोना मुश्किल कर दिया ।  तब मुझ अहसास हुआ , की मैं उस सुन्दरी के साथ बिस्तर पर ना होकर , अकेला बिस्तर पर  पड़ा हूँ  , पर वह  अहसाह इतना गहरा था ,की , मेरा दिल या मानने को तैयार ही ना था , वह  सब हकीकत नहीं सिर्फ एक  सपना था ...


उस आनंद से मेरे जिस्म का रोम रोम जैसे तृप्त था और जिस्म से उठती अलसाई सी अंगड़ाई , मेरे अहसास को और मजबूत कर देती ...मुझे अपने ऊपर विश्वास ही नहीं हो रहा था , की ,कल रात मेने जिस आनंद को भोगा था , असल में वह  सब सिर्फ सपने में था ....उसका हकीकत से कुछ भी लेना देना नही था .....


फिर भी, उस आनंद को याद भर कर लेने से बदन में एक  अजीब सा नशा भरा हुआ था और एक  मीठी मीठी सी थकान मेरे  अस्तित्व पर  छाई हुई थी ।  जो मुझे गर्माते सूरज की रोशनी में भी , बिस्तर पर  लेटे रहने के लिए मजबूर कर रही थी .....


काफी देर लेटे रहने के बाद, जब लघु शंका को एक  समय से अधिक रोक पाना मेरे लिए मुनासिब ना हो पाया और  आखिर कर मुझे बिस्तर छोडना ही पड़ा  । ....किसी तरह बिस्तर से उतर कर, मैं बाथरूम में चला गया , बाथरूम में मैंने , जैसे ही अपने पजामे के नाड़े पर  हाथ रखा , तो मैं चौंक  पड़ा , देखा, पजामे पर , एक  बहुत बड़ा सा धब्बा बना हुआ था ...


जैसे किसी ने ढेर सारा गोंद उसपर  चिपका कर  छोड़ दिया हो ....


उस धब्बे को देख, मेरा माथा ठनका ।  यह धब्बा कल तो नहीं  था , जब मैंने  यह पाजामा पहना था , फिर यह कब और कैसे बना ? मैंने  बहुत सोचा , पर कुछ समझ नहीं आया ।  नहाने धोने के बाद , मैं उस बात को लगभग भूल गया ....


किन्तु , उस दिन के बाद से जब जब रात आती और मैं अकेला बिस्तर पर  करवटें  बदलता , मेरे शरीर में एक  बैचेनी से होने लगती , मेरा यौवन , अपने अनजान साथी की तलाश में तड़पने  लगता , मेरा मन चाहता की, मुझे फिर से कोई ऐसा सपना आए , जिससे मैं अपने तड़पते यौवन की अतृप्त प्यास को  बुझा सकूँ ....पर ऐसा हर बार ना होता ...

वक़्त के साथ ,धीरे धीरे उस सपने को मैं लगभग भूल गया और अपनी रोजाना की जिन्दगी में मशग़ूल  हो गया ।  एक  दिन मैं, दिन भर की आवारागर्दी से इतना  थका हुआ था , की बिस्तर पर  आते ही गिर कर ,नींद के आगोश में खो गया ... अभी मैं कच्ची नींद में था ,की, मैं फिर से, एक  सपने की गिरफ्त में आ गया , पर उस वक़्त मैं गहरी नींद में ना था , ऐसा लगता था जैसे मैं अर्धचेतन अवस्था में लेटा हुआ हूँ , जिसे सपने के साथ साथ बाहर  की दुनिया का भी कुछ अहसास जान  पड़ता था ...


सपने में मैंने  देखा , की , मैं किसी सुंदर रूपवती के साथ बाग़ में लेटा हूँ ...... वह  और मैं दींन दुनिया से बेखबर प्रेम विहार में डूबे हुए है  , उस रूपवती  के आगोश में लिपटा हुआ, मैं उसके उरोजो के साथ खिलवाड़ कर रहा हूँ , उसकी मधुर खनकती हंसी, मेरे हौंसले  को और बढ़ावा दे रही है ..... मैं धीरे धीरे उसके दहकते होंठों  से अपनी प्यास बुझाने लगता हूँ  , फिर वह  और मैं अपने वस्त्र उतार कर जैसे ही सम्पूर्ण आनंद के लिए तैयार होते है , मैं अपनी मंजिल को पाकर , उसका साथ छोड़ देता  हूँ , पर इसी में मुझे असीम आनंद की प्राप्ति हो जाती है .....की , तभी ,मैं महसूस करता हूँ जैसे मैंने अपने तन से , यौवन  से लदे किसी ऐसे बोझ को  जुदा कर दिया , जिसके शरीर से विसर्जित होने से ,मुझे राहत के साथ आनंद की प्राप्ति भी हुई ...


यह आनंद कुछ ऐसा ही था , जो मैं कभी कभी अपने लड़कपन  को ठंडा करने के लिए हाथों से करता था ....


तभी मैं  , सपने से निकल . हकीकत की दुनिया में आ गया ।  मैंने महसूस किया  की , मेरा पजामा आधा गीला  है .... मैं पजामा गीला होने का राज़  समझने की कोशिश में लग गया ..... कभी मुझे लगता , क्या मेने इस उम्र में , बच्चों वाली हरकत तो नहीं कर दी , पर स्थिति ऐसी भी ना थी ,कि  मेरा पजामा इतना  ज्यादा भीगा हुआ हो....

मेरा दिमाग , बार बार सोचता ,आखिर पजामा गीला हुआ तो कैसे ? मैंने  अपनी स्थिति को बहुत ग़ौर  से देखा और समझा , फिर अपने सपने को याद करने  लगा ।  मुझे याद आया, सपने में, उस स्त्री के साथ प्रेम क्रीडा के दौरान... मेंने जो स्खलन किया था , वह  असल में सपने में नहीं हकीकत में हुआ था .....

अगर मेरी जगह कोई और लड़का होता तो शायद डर जाता , वह  सोचता , उसे ना जाने कोई यौन  रोग से सम्बंधित या फिर इस उम्र में बिस्तर गीला करने की बीमारी तो नहीं लग गई ? पर मैंने  बचपन से ही सेक्स से सम्बंधित समस्याएं  पढ़ी थी ।  यह भी उन समस्याओं  में से एक  थी , जिसका सामना हर लड़के को अपनी यौवन  अवस्था में एक  ना एक  दिन करना पड़ता ही है ....

मै तो जानता था , यह एक  प्राकृतिक क्रिया है ।  पर , कॉलेज में ना जाने कितने ही लड़के इसे “स्वप्नदोष” बीमारी समझ नीम हकीमों  से अपना बिना मतलब का इलाज करवाते थे ....जो समझदार थे , वे  दबे छिपे इसे हम जैसों  से समझ लेते थे , की ...

अगर किसी बर्तन  में दूध उसकी कैपेसिटी से ज्यादा भरा जाए तो उसका बाहर  निकलना अनिवार्य है .....


गर्मियों की छुट्टी ख़त्म कर , मैं कॉलेज में आ गया ।  सुनील न मेरी पहली घुड़सवारी की नाकामी मेरे मना करने के  वाबजूद भी हमारे ग्रुप के लोगो में अपने तरीके से फैला दी ... यह और बात थी की , कभी किसी ने मुझसे, उस घटना के बारे में ज्यादा पूछा नहीं , शायद ....


“हमाम में सभी नंगे थे और एक  नंगा दूसरे  नंगे को और क्या नंगा करता”......

या तो कुछ लोगो को इसका अनुभव था या फिर सबने कहीं  सुन रखा था , की पहली , दूसरी या शुरू में ऐसा होना स्वाभाविक है , की आदमी अपनी उत्तेजना पर  काबू नहीं रख पाता और बहाव में बह जाता है ...इसे समझे तो यह ऐसा ही है ।


जब आप नयी नयी गाडी चलाना सीखे तो , कभी क्लच ज्यादा दबता है तो कभी स्पीड , दोनों में एक  सामंजस्य आदमी को धीरे धीरे अनुभव से ही आ पाता   है ।  अधिकतर , नया सिखने वाला शुरू शुरू में गाडी को झटके देकर चलाता है या फिर सडक पर  अचानक से बंद कर देता है ....


सुनील और मेरा एक  और कॉमन दोस्त था , जिसे हम सब उसके खास नाम “ताउजी” कह कर बुलाते थे ।  सुनील की और ताउजी की भी अच्छी जमती थी , एक  दिन मैं ताउजी के कमरे में गया तो , सुनील और वे  दोनों बैठे किसी बात पे हंसी ठट्टा कर रहे थे  । मुझे वहां  आया देख , ताउजी बोले , तो बॉस! इस गर्मियों में , आपने भी “गंगा स्नान कर ही लिया” और  ऐसा कह दोनों जोर जोर से हंसने लगे ....


कहते है चोर की दाढ़ी में तिनका , अब मेरी हालत वैसी ही थी , मुझे लगा शायद सुनील ने इसे मेरी नाकाम घुड़सवारी के बारे में बता दिया है ....मैं भी अपना किताबी ज्ञान झाड़ते हुए बोला यार , बस पहली पहली बार में मज़े  से ज्यादा सजा  हो जाती है ...और दिखावे के लिए बोला .... भाई  पहली बार करने से “मेरा तो सूज भी गया”“ , मुझे तो सुनील की तरह इसकी आदत जो नहीं है और ऐसा कह मैं भी उन दोनों के साथ हँसने  लगा ... अब ताउजी की जिज्ञासा अपनी चरम सीमा पर  थी , वे  मुझसे खोद खोद कर सवाल करने लगे ...उनके सवालों से एक  बात तो पक्की थी , उन्हें यह पता था ,की ...


मैं घोड़ी पे चढ़ा था , पर घोड़ी पर  ऐड लगाने से पहले गिर गया था .....


उसका उन्हें गुमान ना था , शायद सुनील ने उन्हें आधी बात ही बताई थी ... गप्पे हांकते हुए आधी रात होने को आई थी , पर गप्पो का दौर था की ख़त्म ही ना होता था .... कॉलेज में अधिकतर लड़के , सिर्फ लडकियों की ही बाते करते थे , किसका किससे  चक्कर है या कौन किसका दीवाना है , पढाई की बातें  सिर्फ एग्जाम वाले दिनों या जिस दिन कोई टुटोरिअल देना होता , उस दिन होती या फिर क्रिकेट मैच वाले दिन क्रिकेट की बातें , वरना बाँकी सारा दिन रात , लड़कों  का बस एक  ही टॉपिक होता ...


“नारी का स्वाभाव, उसका  शरीर  , उसकी पसंद , ना पसंद का  क्या रहस्य है?” .....

कितनी अजीब बात थी , जिस बात को उन्हें अपने अनुभव से समझना था , उसे वह  किसी सस्ती सडक छाप पत्रिका से , या एक  दुसरे के झूठे सच्चे अनुभव से सीखते थे...

ताउजी के कमरे से विदा ले , हम दोनों आकर अपने अपने कमरे में सो गए ....

अगले दिन रविवार था , उस दिन सब लोग देर से सो कर उठते , हम सब दोस्तों ने  उस दिन इकट्ठे  ही नाश्ता किया ।  अगली सुबह सुनील मेरे कमरे में  मुझे उठाने आ गया , बोला .... चलो ताउजी को भी नाश्ते के लिए साथ ले चलते है ...

हम दोनों ताउजी के कमरे पर पहुंचे और दरवाजा खटखटा दिया ।  ताउजी नींद में थे  ।  काफी देर खटखटाने के बाद , उन्होंने उंघते हुए दरवाजा खोला और बोले , अरे यार , अभी थोड़ी देर बैठो , मैं जरा ब्रश कर लूँ , फिर चलते है ....

ताउजी ब्रश लेकर जैसे ही ,मेरे सामने से निकले , की मैंने ... उनके पजामे  पर एक  बड़ा सा धब्बा बना देखा । उसे देख  ,मेने सुनील के कान में कहा , आज ताउजी ने रात में गरमा गर्म सपना देखा है ...उसने मुझसे पुछा , तुझे कैसे पता , तो मैंने  ताउजी के पजामे की तरफ इशारा कर दिया , उसे देख वह  भी मंद मंद मुस्कुराने लगा ....


नाश्ते की टेबल पर बैठे बैठे मैंने  भी , ताउजी से कल की उनके द्वारा की गई ज़िरह बाज़ी का बदला लेने की ठान ली , कल बच्चू बहुत खोद खोद कर सवाल पूछ रहे थे ... आज देखता हूँ क्या जवाब है ?


मेने ताउजी से पुछा , कल रात बड़े रंगीन सपने आए , ताउजी सफ़ेद झूठ बोलते हुए बोले , अरे नहीं कल तो मैं रात भर मैथ्स का असाइनमेंट कर रहा था और फिर सो गया ।  मैं बोला फिर सपने में क्या हुआ ?


ताउजी बोले , अबे , उस जैसे खडूस मैथ्स टीचर का काम करने के बाद, किसे भला कभी रंगीन सपना आ सकता है ? मैंने  भी ताउजी को नीचा  दिखाने  की ठान रखी थी । मैंने  सबके सामने , उनके पजामे की तरफ इशारा कर दिया और पूछा  तो , यह निशान कैसा ? अब ताउजी सकपका गए और सफ़ेद झूठ बोले , अरे कुछ नहीं बस ब्रश करते वक़्त कुछ पानी गिर गया....


उनकी बात सुन हम सब जोर जोर से हँसने  लगे , शायद अधिकतर लड़के उस अनुभव से गुजर चुके थे या फिर गुजर रहे थे ..सबको हँसता देख , मैंने  ताउजी से कहा ...

ताउजी सिर्फ आपके  पजामे पर ही  पानी नहीं गिरा , यह पानी , आजकल सबके पजामों पर रात में गिरता है और ऐसा  कह सब जोर जोर से हँसने  लगे ...उस वक़्त मेरी हंसी थी की थमती ही ना थी , मैं जोर जोर से पेट पकड कर हंस रहा था , शायद अपनी हीन भावना को हंसी में उड़ा रहा था ....

मुझे यूँ   ज़ोर ज़ोर  से हँसता देख, मेरे बराबर में लेटी मीना मुझे जोर जोर से हिलाने लगी और गुदगुदी करते हुए बोली , अरे क्या पागल हो गए हो , जो सपने में यूँ बेबकूफ़ों  की तरह हंस रहे हो ....


मैंने आँखें  खोली तो देखा , मैं अपनी गर्लफ्रेंड मीना के साथ बिस्तर पर लेटा हुआ था , उस वक़्त हम दोनों , मेरे कमरे में बिस्तर पर लेटे थे ,उसका सर मेरी छाती पे था और मैं एक  हाथ से उसके बालों को सहला रहा था , ना जाने कब “KK बॉस” वाला किस्सा सुनाते सुनाते मेरी आँख लग गई थी और मैं अपने उस लडकपन में खो गया था , जिसने मुझे नारी के रहस्य को समझने के लिए एक  नयी दिशा दी थी ....


कितनी अजीब बात थी , उस वक़्त , एक  खुबसूरत जवान लड़की मेरे साथ थी , फिर मुझे अपने ऊपर पूरा कण्ट्रोल था , ना मुझे कोई घबराहट थी , ना किसी तरह की उत्तेजना , मैं शांत निश्चल सा लेटा हुआ था ....इसके विपरीत रोनी की बीवी के सपर्श से ही , मैं अपने बहाव में बह गया था .....


शायद उस दिन नाले का पानी पीना मेरी किस्मत में नहीं लिखा था , इसलिए मैं नाले में गिरने से पहले ही फिसला गया था ....


मैंने  मंद मंद मुस्कराते  हुए मीना की तरफ देखा , उसने अपनी नजरे मेरे चेहरे पे टिका दी और दोनों कोहनियां  मेरी छाती पर  रख कर बोली , मुझे देख कर क्यों हंस रहे हो ? बताओ ,क्या मेरा सूट अच्छा नहीं है , या बालों  में लगे क्लिप में कोई प्रॉब्लम है ?


मैंने  हँसते हुए कहा  ,नहीं यार, ऐसी कोई बात नहीं , मैं  तुझे देख कर नहीं हंस रहा , मैं  तो सपने के बारे में सोच हंस रहा हूँ , की , मैं भी कितना बेवकूफ था , जो मीठे झरने को छोड़ , गंदे नाले से प्यास बुझाने चला था ।  मेरी बात का मतलब मीना को समझ नहीं आया । वह  मुझे कौतुहल  भरी नज़रों  से घूरने लगी , मैंने  भी बात को बदलने के लिए , उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में भर लिया और उसके होठों  को अपने होठों की गिरफ्त में ले लिया ....

क्रमश :......

By 
Kapil Kumar 

Note: “Opinions expressed are those of the authors, and are not official statements. Resemblance to any person, incident or place is purely coincidental.' ”

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